कृषि और चिकित्सा जैसे आधारभूत क्षेत्रों में एआइ का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. माइक्रोसॉफ्ट एआइ संचालित रोबोट विकसित करने के लिए कृषि कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन एआइ का उपयोग कर कीट और बीमारी प्रतिरोधी फसलें विकसित करने के लिए शोध में निवेश कर रहा है. आइबीएम वॉटसन का उपयोग अस्पतालों द्वारा चिकित्सकीय छवियों का विश्लेषण कर कैंसर की सटीक पहचान करने के लिए किया जा रहा है. शोधकर्ता डीपमाइंड के अल्फाफोल्ड से प्रोटीन संरचनाओं की भविष्यवाणी कर रहे हैं, जिससे नयी दवाओं और उपचारों का विकास हो सकता है. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि एआइ पर काम काफी लंबे समय से चल रहा था, लेकिन पिछले 18 महीनों में एआइ क्षेत्र में तीव्र विकास हुआ है. उन्होंने समावेशी विकास के लिए एआइ की क्षमता के उपयोग में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और एआइ के उपयोग से चिकित्सा जैसे आम नागरिक सेवाओं को सुलभ बनाने और सटीक तकनीकों द्वारा कृषि में सुधार के प्रयासों की चर्चा भी की. जीपीएआइ शिखर सम्मलेन में डाटा सुरक्षा के अलावा निजी संस्थाओं द्वारा डाटा के स्वामित्व और सीमित उपयोग को सुनिश्चित करने के भी प्रयास हो रहे हैं. एआइ नियमन और प्रचालन की सबसे प्रमुख वैश्विक संस्था में मुख्य नेतृत्व की भूमिका मिलना प्रौद्योगिकी, एआइ और वैश्विक समायोजन में भारत की बढ़ती कुशलता का परिचायक है. आशा है कि जीपीएआइ सामाजिक और समावेशी विकास के लिए एआइ के उपयोग को सुनिश्चित करने में सफल होगा.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)


